• November 6, 2025
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       भोकालियों का शहर जो जीते है रंगबाजी से  …ऐसे  कनपुरिया जुमले और शब्द, जिनसे कइयों को मिली शोहरत

कानपुर की स्थानीय भाषा के रौबीले शब्दों ने बॉलीवुड में ऐसी पहचान बनाई जो  कई फिल्मों में इस्तेमाल हुई है और इन फिल्मो का  कॉमेडी में अपना अलग स्थान बनाया आज भी तनु  वेड्स मनु में तनु  के कनपुरिया बोली अंदाज लोगो को बहुत पसंद आता है

शहर के शब्दों में इतना आकर्षण है कि उनकी वजह से छोटे पर्दे से लेकर बॉलीवुड तक कानपुर के मिजाजी शब्दों का ‘भौकाल टाइट’ होता जा रहा है। कई फिल्मों में ‘रंगबाज’ पात्र यहां की बोली बोलते नजर आते हैं। तनु वेड्स मनु, टशन, बुलेट राजा जैसी फिल्मों के डायलॉग आपको याद ही होंगे। आज कई चर्चित कॉमेडियन भी कानपुर के शब्दों के इस्तेमाल से स्टार बन गए हैं।

बड़ी रौबीली है कानपुरिया भाषा

साहित्यकारों के बीच बहस का मुद्दा है कि कथा, कहानी, उपन्यास में नई हिंदी का इस्तेमाल होना चाहिए या नहीं। ‘नई हिंदी’ का मतलब उस भाषा शैली से है, जो आजकल नए कलमकार इस्तेमाल कर रहे हैं। वह देशज या कहें कि स्थानीय आम बोलचाल के शब्दों को अपने लेखन में स्थान देते हैं। साहित्य में स्थान पाने के लिए शब्दों का यह संघर्ष देश के सभी क्षेत्रों में चल रहा है, लेकिन ‘कनपुरिया भाषा’ उससे अलग खड़ी इतरा रही है। वजह ये है कि यहां की अलहदा और रौबीली भाषा को किसी कलम की दरकार नहीं है। 

अपनापन कानपुर की भाषा की मुख्य विशेषता है  –

“तुम सरऊ पेले जइयो।”

यहाँ पर यकीनन किसी को धमकी नही दे रहे बल्कि समझा रहे हैं।

कानपुर की भाषा के कुछ शब्द जो सिर्फ यहीँ सुनने को मिलेंगे अजीब सा अच्छा अहसास देते हैं।

कंटाप, झाड़ना, भौकाल, पउवा ऐसे न जाने कितने शब्द आपको चलते फिरते सुनने को मिलेंगे।ऐसे ही बहुत सारी मिठास भरी बातें हैं।

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